महान कवि तुलसीदास की जीवनी

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको महान कवि तुसलीदास जी की जीवनी बताएँगे. तुसलीदास जी एक बहुत महान कवि थे और इस बात को हिंदी साहित्य, भारतीय साहित्य और दुनिया के साहित्य में इन्हें बहुत महान कवि माना गया है, महान कवि होने के साथ-साथ वो एक संत भी थे. जिन्होंने बहुत सी किताबे लिखे और सम्पूर्ण दुनिया में ज्ञान निसुवार्थ भाव से बाटा. लेकिन दुःख की बात ये है की इस महान कवि के जनम को लेकर संतो में विवाद है और इनकी जनम तिथि विवादों में है.

तुलसीदास का जन्म

एक ऐसा महान कवि जिसकी प्रतिभा से भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में ज्ञान बाटा आज उसकी जन्म की तिथि को लेकर संतो के बीच विवाद रहता है कोई तुलसीदास की जन्म तिथि १५५४ तो कोई १५३२ बता है, अगर आपको किसी अन्य सूत्र से इनकी जनम थी अलग पता चली है तो आप हमें कमेंट कर जरुर बताये. महान कवि तुलसीदास की जनम भूमि होने का गौरव राजापुर को मिला है, इनकी जनम भूमि सोरों को भी मन जाता है क्योकि वहा पर इनके स्थान के अव्सेस है और इनके भाई के उतराधिकारी नरसिंह का मंदिर है.

कवि तुलसीदास का सुरुवाती जीवन

उनके बचपन का नाम रामबोला था, इनके पिता का नाम आत्मा राम दुबे और माता का नाम हुलसी देवी था. जिन्ही आज हम महान कवि के नाम से जानते है उनके गुरु का नाम नर हरिदास था. साधारण बच्चे का जन्म 9 महीने अपनी माँ के पेट में रहने के बाद हो जाता है परन्तु इनका जन्म 12 महीने अपनी माँ हुलसी के पेट में रहने के बाद हुवा था तब तक इनके दांत निकल चुके थे और बोलना सिख चुके थे जन्म लेने के बाद इन्होने पहला नाम राम का लिए और इनका नाम उसी पर रामबोला रख दिया गया. फिर बाद में चलकर इनका नाम तुलसीदास रखा गया.

इनके जन्म के बहुत कम समय तक ये अपने माता-पिता के साथ रहे फिर इनके माता-पिता का देहांत हो गया और जो इनकी माता की दासी थी जिसका नाम चुनिया था वो अपने साथ उसे गावं ले गयी और 5 साल 6 महीने तक पालन पोषण करने के बाद उसका भी देहांत हो गया.

तुलसीदास का हनुमान और वाल्मीकि से संबंद

भाविशोय्त्तर पुराण के अनुसार, भगवन भोलेनाथ को अपनी पत्नी पारवती को बताते हुवे पाया गया की वाल्मीकि कलयुग में जन्म लेगा और सबका यही मानना था है की तुलसीदास ही वाल्मीकि का पुनर जन्म है.

महान कवि तुलसीदास वाराणसी में गंगा किनारे रहा करते थे, ऐसा माना गया है की हनुमान जी उनके पास रामलीला सुनने के लिए आया करते थे.

महान कवि तुलसीदास के गुरु

चुनिया का देहांत हो जाने के बाद वो अनाथो का जीवन जीने के लिए मजबूर हो गए थे. फिर उनकी मुलाकात अपने गुरु नर हरिदास से हुयी जिन्होंने इनका नाम रामबोला से बदलकर तुलसी राम रख दिया और इन्हें अपना छात्र बना लिया.

तुलसीदास जी का विवाहित जीवन

महान कवि तुलसीदास का विवाह 29 वर्ष की आयु में रत्नावली नाम की कन्या से हुवा था. गौना के न होने की वजह से वे कशी जा पहुचे और और वेदांग के अध्यन में जुड़ गयें. फिर कुछ समय बाद उन्हें अपनी पत्नी रत्नावली की याद सताने लगी तो वे फिर राजापुर आ जाये और रात को ही यमुना को तैर कर पार करने के बाद अपनी पत्नी के मायके पहुँच गए क्योकि गौना न होने की वजह से उनकी पत्नी अपने मायके में थी और जब वे उसके कक्ष में पहुचे तो उनकी पत्नी ने उन्हें दोहा सुनाया जिसके बाद वे तुलसीराम से तुलसीदास बन गए. इस दोहे को सुनने के बाद वे अपने गावं चले गए और एक साधू का जीवन जीने लगे.

दोहा जो उनकी पत्नी ने उन्हें सुनाया था:

अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति।
नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत।।

तुलसीदास का जीवन संक्षेप में’

पूरा नामगोस्वामी तुलसीदास
पिता का नामआत्माराम दुबे
माता का नामहुलसी देवी
जन्म1532/1554
मृत्यु1623
गुरुनर हरिदास
पत्नीरत्नावली
बेटातारक
महाकाव्यरामचरितमानस

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तुलसीदास के महान कार्य और लेख

१. रामचरितमानस

तुलसीदास जी ने रामनवमी पर चैत्र में महीने में, 1631 में लिखना सुरु किया था, और उन्हें रामचरितमानस पूरा करने में 2 साल 6 महीने और २६ दिन लगे थे और इसे पूरा करने के बाद वे वारानसी आये और काशी विश्वनाथ मंदिर में भोलेनाथ और पारवती को सोप दी.

2. दोहावली

उन्होंने अपनी सभी दोहे इसके अन्दर लिखे थे कुल मिलकर ५७३ दोहे थे और इनमे से 85 दोहों का प्रयोग रामचरितमानस में भी किया गया था.

३. गीतावली

ये साथ किताबो में बाटी हुयी थी और इसमें 328 ब्रज गाने थे.

4. कवितावली

इसको भी साथ किताबो में बाटा हुवा था और इसमें कई एपिसोड भी थे और सभी ब्रज कहानिया थी.

5. क्रिश्नावली

इसमें उन्होंने ६१ ब्रज गाने खास भगवन कृष्ण के लिए लिखे थे.

6. विनयपत्रिका

इसके अन्दर इन्होने 279 ब्रज भाषा में पद लिखे गए थे.

इनके कुछ अन्य कार्य: बरवाई रामायण, पारवती मंगल, जानकी मंगल, रामलला नहछू, रामज्ञ प्रश्न, वैराग्य संदीपिनी, हनुमान बहका और तुलसी सतसई.

तुलसीदास को हनुमान जी कैसे मिले?

जैसे की हमने आपको पहले ही बताया है की हनुमान जी उनके पास रामायण सुनने आते थे एक दिन कथा में तुलसीदास ने हनुमान जी को देखा और और उनके पैरो में पद गए और बोले में आपको जानता हूँ प्रभु आप हनुमान जी है और उन्होंने हनुमान जी के सामने राम जी से मिलने की इच्छा बताई तो हनुमान जी ने उहे असिर्वाद दिए और बताया की भगवान राम आपको चित्रकुट में मिलेंगे.

तुलसीदास का भगवान राम से मिलन

हनुमान जी के दुवारा रास्ता दिखाया जाने पर वे चित्रकुट आ गए और रामघाट में आश्रम में रहते लगे. जब एक दिन तुलसीदास कामद गिरी पहाड़ की परिकर्मा करने के लिए गए तो उन्होंने घोड़े पर सवारी करते हुवे दो राजकुमार मिले परन्तु तुलसीदास ने उन्हें नहीं टोका फिर जब उन्हें हनुमान से पता चला की वे राम और लक्ष्मण है.

तो उन्हें बहुत अफ़सोस हुवा और फिर जब अगले दिन वे चन्दन की लकडियो को पीसकर उन्हें तिलक के लिए टियर कर रहे थे तभी उनके पास भगवान श्री राम और उन्हें तिलक लगाने को कहा परन्तु तुलसीदास उनके मोह में ऐसा दुबे की वो उन्हें देखते ही रह गए उसके बाद प्रभु श्री राम ने खुद उन्हें और अपने आप को तिलक लगा दिया. तुलसीदास जी ने वहा श्री राम को पूर्ण तरीके से देखा और ये सभी बात उन्होंने आपने गीतावली में लिखी है.

तुलसीदास की मृत्यु

उनकी अंतिम रचना विनयपत्रिका को लिखने के बाद उन्होंने 162३ में उनका देहांत हो गया. फिर जिस घाट पर वे अपना जीवन बिताया करते थे उसका घाट का नाम तुलसी घाट रख दिया गया. और उन्होंने वहा पर हनुमान जी का मंदिर भी बनवाया था.

Conclusion

आज हमने आपको इस लेख के जरिये तुलसीदास की जीवनी – biography of Tulsidas बताया है यदि हमारे इस लेख में आपको कोई गलती नज़र आती है या फिर किसी स्थान का नाम एवं इनसे जुडी कोई जानकारी आपको गलत लगती है तो आप हमें कमेंट में जरुरु बताये, या फिर हमसे कोई डिटेल छुट गयी है वो भी आप हमें कमेंट कर बता सकते है, धन्यवाद.

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